"पुतले का दर्द" पर आधारित
चमत्कारी डिबिया
उसके पास आज भी खाने को कुछ नहीं था.आज भी ठेकेदार ने मजूरी यह कहकर नहीं दिया कि साहब ने पैसे नहीं भेजवाये हैं. वो जैसे ही झोपडी में घुसी तो भूखे फुलवा ने उसके हाथ से खाली थैला खींच लिया. अरवा में रखी बासी चरेर रोटी को पानी में फुला कर नमक के साथ वो फुलवा के सामने रख दी, फुलवा के पेट की आग बुझी तो वो जमीन में लेटकर गहरी नींद में सो गया. वो अपनी कमर से एक डिबिया निकाली, उससे एक चुटकी सफेद पाउडर फांका, एक लोटा पानी गटककर,पेट में एक कपडे से टाइट गांठ बांधी और चुपचाप जाकर कुछ ही छणों में इस उम्मीद से सो गई कि शायद उसे भी रोटी का टुकडा कल नसीब हो जाये.
अनिल अयान, सतना
चमत्कारी डिबिया
उसके पास आज भी खाने को कुछ नहीं था.आज भी ठेकेदार ने मजूरी यह कहकर नहीं दिया कि साहब ने पैसे नहीं भेजवाये हैं. वो जैसे ही झोपडी में घुसी तो भूखे फुलवा ने उसके हाथ से खाली थैला खींच लिया. अरवा में रखी बासी चरेर रोटी को पानी में फुला कर नमक के साथ वो फुलवा के सामने रख दी, फुलवा के पेट की आग बुझी तो वो जमीन में लेटकर गहरी नींद में सो गया. वो अपनी कमर से एक डिबिया निकाली, उससे एक चुटकी सफेद पाउडर फांका, एक लोटा पानी गटककर,पेट में एक कपडे से टाइट गांठ बांधी और चुपचाप जाकर कुछ ही छणों में इस उम्मीद से सो गई कि शायद उसे भी रोटी का टुकडा कल नसीब हो जाये.
अनिल अयान, सतना
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