Monday, 19 November 2018

पढाई लिखाई





लघुकथा
 पढाई लिखाई
सुबह सुबह  पचासी वर्षीय दादा जी सैर करने निकले ही थे कि कुछ दूर चलने पर क्या देखा कि दो नौजवान एक आटो वाले से पूंछताछ कर रहे थे। देखने  और बातों को सुनने से महसूस हुआ कि बाहरी लडके
"क्यों भाई ये विद्या कॉलेज कहाँ है?"
"पता क्या लिखा है?"
दोनों ने मोबाइल की स्क्रीन को पढने की कोशिश की
"करांची रोड़, मौदा,"
आटो वाला पता सुनकर दो मिनट दिमाग के घोड़े दौड़ाया और फिर कुछ सोचकर बोला।
"लगता है बाबू गलत शहर उतर गये हो।"
"क्या बकता है बे। ये सतना है ना?"
"सतना तो है पर यह पता नहीं पता।"
दादा जी को माजरा समझ मे आ गया । उन्होने दोनों नौजवानों को पास बुलाया और  पूंछा क्या बात हो गई है, 
दादा जी को वो मोबाइल दिखाते हुए बोले, 
"आप  ही हमारी मुश्किल सुलझाइये, आटो वाला कह रहा है कि आप लोग गलत शहर आ गये हैं। यह पाकिस्तान का पता लगता है।"
दादा जी ने मोबाइल देखा और धीमी हंसी हंसते हुए आटो वाले से बोले 
"ऐ !इन्हे विट्स कालेज करही रोड ले जाओ।"
उन दोनों को विदा करते हुए दादा जी उनसे कहा,"ऐसी पढ़ाई लिखाई का क्या मतलब जो विद्यार्थियों को सिर्फ कागज के टुकड़े जैसी डिग्री तो देती है पर ज्ञान नहीं।"
सुनकर दोनों नौजवान दादाजी की ओर ताकते ही रह गए और ऑटो आगे बढ़ गयी। 


अनिल अयान, सतना