Thursday, 28 April 2016

लघुकथा-४ कीमत

लघुकथा-४ कीमत
झोपड़ी और महल किसी समय में बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे.. मुझे याद है कि एक समय में महल पानी के लिये झोपड़ी के यहां कुयें से पानी लाया करता था. पिछले साल सूखा ऐसा पड़ा कि सबके वारे न्याये हो गये.. उस समय महल के चिरौरी करने पर झोपड़ी ने महल के यहां मजदूरी करके ट्यूबवेल खोदा. महल ने दोस्ती की कीमत लगा कर उसका मानदेय भी झोपड़ी को दिया.. अचानक ट्यूबवेल के लगने से जल स्तर पाताल चला गया.. झोपड़ी का कुंआ सूख गया.. उसके कंठ सूखने लगा... मरती क्या न करती वो एक रात एक बाल्टी पानी के लिये महल के यहां गई.. महल ने उसे नीचे से ऊपर तक कई बार निहारा... ट्यूबवेल चालू करके उसने बाल्टी पानी भरने के लिये रख दिया... महल ने झोपड़ी के कंधे में हांथ रखा. महल उसे और अंदर ले गया... कुछ समय बाद.. बाल्टी भर चुकी थी... अस्त-व्यस्त और चूर हो चुकी झोपड़ी पानी लेकर वापिस आने को हुई. महल ने लौटती झोपड़ी से कुटिल मुस्कान देेते हुये इतना ही कहा कि तुम रोज रात को यहां पानी ले जा सकती हो....

लघुकथा-४ गैप.

लघुकथा-४
गैप.
छोटी बहू सासू मां से सलवार सूट पहनने की इजाजत मांग रही थी .. वो जानती थी कि बडी भाभी सलवार सूट ही पहनती हैं. सासू मां साड़ी ब्लाउज के लिये अड़ी हुई थी और संस्कारों की दुहाई देने लगी.... आखिर कार छोटी बहू ने कह ही दिया.." मां जी जब नूतन( नंद ) जींस और टाप पहन कर कालेज जाती है तो जींस और टाप के बीच के गैप से झांकता बदन क्या देह प्रदर्शन नहीं है... और साड़ी ब्लाउज के बीच के गैप झांकता हमारा बदन देह प्रदर्शन नहीं है..... सलवार सूट में तो हमारा शरीर ढका ही रहता है.." सासू मां निरूत्तर थी.. उनका मौन ही हामी बन चुकी थी. बड़ी भाभी का संस्कार इस तरह विजयी हो चुका था....

मन की बात

लघुकथा-05
मन की बात
दस साल की मुन्नी आज कल रेडिओ में प्रधानमंत्री जी द्वारा आयोजित मन की बात बहुत ध्यान से सुनती है. एक दिन उसने अपने पाप से पूँछ ही लिया." पापा-पापा हमारे देश के प्रधानमंत्री जी अपनी मन की बात रेडिओ से क्यों करते है," पापा ने मुन्नी की बात ध्यान से सुनते हुए बोले" बेटा जिनके पास अपने कोई नहीं होते, उन्हें अपने मन की बात रेडिओ से ही करना पड़ता है." 

Monday, 25 April 2016

लघुकथाः 4अपने हिस्से की खुशी

लघुकथाःअपने हिस्से की खुशी
वो अचानक हवेली के अंदर ठंड के काश्मीरी कपड़ो की बिक्री के लिये प्रवेश किया.हवेली की महिलायें मोल भाव करने मे तुल गयी.वो कपड़ो की विशेषाताओं के पुल बांधकर दो तीन तथाकथित काश्मीरी गर्म शाल और अन्य कपडें अच्छे लाभ के साथ बेचा और खुश होकर हवेली से बाहर आ गया. उधर महिलायें अपने किये मोल भाव फूली नहीं समा रहीं थी. बस दोनों को अपने अपने हिस्से की खुशी मिल गयी.

लघुकथा -2 विकास

लघुकथा -2 विकास

दस साल की लाड़ो कसेहड़ी मे पानी भर कर पास के गांव से ला रही थी.. रास्ते में बरगद के नीचें बूढ़ा बाबा रेड़ियो मे गाने का आनंद ले रहा था. लाड़ो ने बाबा से पूंछ ही लिया. बाबा हमारे देश में कितना विकास हुआ. बाबा ने बीडी का कस ले ते हुये बोला बिटिया पहले पानी लेने पैदल जाया करते थे. फिर कुछ सालों बाद बैलगाड़ी से जाने लगे..अब साइकिल और टैंकर में पानी आने लगा.. सरकार ने जल रेलगाड़ी चला दी.. आगे देखना हवाई जहाज से पानी मिलेगा.. लाड़ो ने बाबा के जुमले मे जोर का ठहाका लगाया और कसेहड़ी लेकर घर की ओर चल दी...

1.लघुकथा- पांव

1.लघुकथा
पांव
एक दस साल बच्चे को अपनी रंग बिरंगी चप्पलों से बहुत प्यार था..ठीक उतना ही जितना की उसके पिता को उससे.. बेटे के पैर सही ढ़ंग से काम करना कम कर दिये. पिता को डाक्टर से पता चला दोनो पैर किसी वजह काटने पड़ेगे. दिल में पत्थर रख िपता बेटे को हास्पीटल ले गये... आपरेशन थियेटर तक बच्चे ने अपने हांथ मे चप्पलें पकड़.रखा था.. वो पापा को चप्पलें देकर आखिरकार अंदर गया... आपरेशन सफल रहा.. पिता ने चप्पलें दरवाजे के पास रखी डस्टबिन में फेंक दिया... अब चप्पलों को पहनने वाले पांव बहुत दूर जा चुके थे