Wednesday, 18 May 2016

लघुकथा:शर्त

लघुकथा:शर्त
योगेश ने डिजर्टेशन प्रोजेक्ट के वाइवा के दौरान एक्सटर्नल की टेबल में जैसे ही नजर डाली. उसे समझ में आया कि टेबल में रखे कई प्रोजेक्ट उसके प्रोजेक्ट से काफी मिलते जुलते हैं.उसका माथा ठनक गया.उसके दिमाग की सुई अनन्या पर जाकर रुक गई.जो उसके स्टडी मटेरियल साझा करने में सबसे आगें रहती है. कालेज वाले अनन्या को उसकी गर्ल फ्रेंड के रूप से बदनाम किये हुये हैं. अनन्या से वो जितने प्रतिशत मोहब्बत करता था अनन्या उससे उतने ही प्रतिशत मोहब्बत करने का ढोंग करती थी. उसका शक उस समय यकीन में बदल गया जब वो गर्ल्स कामन रूम के बगल से निकला.उसके कानों में अनन्या की आवाज गूंज गई. अंदर से अनन्या अपनी सहेलियों से कह रही थी."दो शर्त के पांच हजार रुपये. देखा! मैने योगेश के डिजर्टेशन प्रोजेक्ट को वाइरल करने में कामयाब हो गई.उस किताबी कीडे को प्रेमजाल में बांधना भी बहुत उबाऊ रहा." अन्य सहेलियॊं ने जवाब दिया "चल इस पेपर में अच्छे मार्क्स लाने की खुशी में पार्टी तो दे दे.शर्त के रुपये तू ने जीते हैं." योगेश मोहब्बत के विभीषण को समझने के बाद चुपचाप चला गया.
अनिल अयान.सतना.

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