लघुकथा-२
घावघुप्प
बेटी आज ब्वायफ्रेंड की बर्थडे पार्टी से रात बारह बजे वापिस लौटी. मां के समझाने पर पापा ने बड़ी मुस्किल से लंबी लंबी हिदायतें देकर जाने की परमिशन दी थी.मां ने जैसे दरवाजा खोला तो बेटी की लड़खड़ाती जुबां ने बता दिया कि बेटी ने ड्रिंक किया है... ना मां ने कुछ कहा ना ही गैलेरी मे बेसब्री से इंतजार कर रहे पापा ने.बेटी ने नशे में भी दोनो के घावघुप्प होने के पीछे की डांट का अंदाजा लगाकर दबे पांव रूम की ओर बढ़ गई...
अनिल अयान..सतना
घावघुप्प
बेटी आज ब्वायफ्रेंड की बर्थडे पार्टी से रात बारह बजे वापिस लौटी. मां के समझाने पर पापा ने बड़ी मुस्किल से लंबी लंबी हिदायतें देकर जाने की परमिशन दी थी.मां ने जैसे दरवाजा खोला तो बेटी की लड़खड़ाती जुबां ने बता दिया कि बेटी ने ड्रिंक किया है... ना मां ने कुछ कहा ना ही गैलेरी मे बेसब्री से इंतजार कर रहे पापा ने.बेटी ने नशे में भी दोनो के घावघुप्प होने के पीछे की डांट का अंदाजा लगाकर दबे पांव रूम की ओर बढ़ गई...
अनिल अयान..सतना
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