लघुकथा-४
गैप.
छोटी बहू सासू मां से सलवार सूट पहनने की इजाजत मांग रही थी .. वो जानती थी कि बडी भाभी सलवार सूट ही पहनती हैं. सासू मां साड़ी ब्लाउज के लिये अड़ी हुई थी और संस्कारों की दुहाई देने लगी.... आखिर कार छोटी बहू ने कह ही दिया.." मां जी जब नूतन( नंद ) जींस और टाप पहन कर कालेज जाती है तो जींस और टाप के बीच के गैप से झांकता बदन क्या देह प्रदर्शन नहीं है... और साड़ी ब्लाउज के बीच के गैप झांकता हमारा बदन देह प्रदर्शन नहीं है..... सलवार सूट में तो हमारा शरीर ढका ही रहता है.." सासू मां निरूत्तर थी.. उनका मौन ही हामी बन चुकी थी. बड़ी भाभी का संस्कार इस तरह विजयी हो चुका था....
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छोटी बहू सासू मां से सलवार सूट पहनने की इजाजत मांग रही थी .. वो जानती थी कि बडी भाभी सलवार सूट ही पहनती हैं. सासू मां साड़ी ब्लाउज के लिये अड़ी हुई थी और संस्कारों की दुहाई देने लगी.... आखिर कार छोटी बहू ने कह ही दिया.." मां जी जब नूतन( नंद ) जींस और टाप पहन कर कालेज जाती है तो जींस और टाप के बीच के गैप से झांकता बदन क्या देह प्रदर्शन नहीं है... और साड़ी ब्लाउज के बीच के गैप झांकता हमारा बदन देह प्रदर्शन नहीं है..... सलवार सूट में तो हमारा शरीर ढका ही रहता है.." सासू मां निरूत्तर थी.. उनका मौन ही हामी बन चुकी थी. बड़ी भाभी का संस्कार इस तरह विजयी हो चुका था....
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