Monday, 25 April 2016

लघुकथाः 4अपने हिस्से की खुशी

लघुकथाःअपने हिस्से की खुशी
वो अचानक हवेली के अंदर ठंड के काश्मीरी कपड़ो की बिक्री के लिये प्रवेश किया.हवेली की महिलायें मोल भाव करने मे तुल गयी.वो कपड़ो की विशेषाताओं के पुल बांधकर दो तीन तथाकथित काश्मीरी गर्म शाल और अन्य कपडें अच्छे लाभ के साथ बेचा और खुश होकर हवेली से बाहर आ गया. उधर महिलायें अपने किये मोल भाव फूली नहीं समा रहीं थी. बस दोनों को अपने अपने हिस्से की खुशी मिल गयी.

No comments:

Post a Comment