Monday, 25 April 2016

1.लघुकथा- पांव

1.लघुकथा
पांव
एक दस साल बच्चे को अपनी रंग बिरंगी चप्पलों से बहुत प्यार था..ठीक उतना ही जितना की उसके पिता को उससे.. बेटे के पैर सही ढ़ंग से काम करना कम कर दिये. पिता को डाक्टर से पता चला दोनो पैर किसी वजह काटने पड़ेगे. दिल में पत्थर रख िपता बेटे को हास्पीटल ले गये... आपरेशन थियेटर तक बच्चे ने अपने हांथ मे चप्पलें पकड़.रखा था.. वो पापा को चप्पलें देकर आखिरकार अंदर गया... आपरेशन सफल रहा.. पिता ने चप्पलें दरवाजे के पास रखी डस्टबिन में फेंक दिया... अब चप्पलों को पहनने वाले पांव बहुत दूर जा चुके थे


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